तेरे सिवा माँ कही है न ठिकाना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे सिवा माँ कही है न ठिकाना,

दर दर भटका हु देखा ज़माना,

तेरे सिवा माँ कही है न ठिकाना,

जाऊ तो जाऊ किस चौकठ पे जाऊ,

दुःख अपने मन के मैं किसको सुनाऊ,

बहुत रो चूका हु अब न रुलाना,

तेरे सिवा माँ कही है न ठिकाना,

मात भवानी मुझे चरनी लगा लो,

जैसा भी हु मियां मुझको निभा लो,

हर इक मुसीबत से मुझको बचाना,

तेरे सिवा माँ कही है न ठिकाना,

बेटा जगे तो माँ ही न सोती,

बेटा दुखी हो तो माँ भी रोटी,

माँ जैसा कोई न कहता ज़माना,

तेरे सिवा माँ कही है न ठिकाना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।