हिवड़े लगावे दादी चाव से

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

दुःख का जब बादल छावे कोई न धीर बंधावे,

हिवड़े लगावे दादी चाव से माहने,

आफत जब आवे माह में सब नजर मोड़े जी,

झूठा दुनिया का रिश्ता पल भर में तोड़े जी,

दादी जी सु प्रेम पुराना महाने हर कदम निभानो हिवड़े लगावै दादी चाव से,

दुःख का जब बादल छावे कोई न धीर बंधावे,

हिवड़े लगावे दादी चाव से माहने,

आवे आनंद है माहने गुण थारा गावा जी,

पलका जब खोला ठाका दर्शन मैं पावा जी,

याद ली आवे माहने हिचका सतावे माहने,

हिवड़े लगावै दादी चाव से,

घर घर में डंका बाजे सब मंगल गावे जी,

भगता की लाज बचावण दादी खुद आवे जी,

सोइ चिंता न कोई जाएगी तकदीर है सोइ,

हिवड़े लगावे दादी चाव से,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।