हलवे दी थाली भर भर के ले आवा गी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हलवे दी थाली भर भर के ले आवा गी,

ऐवे ही भुलाई सदा ऐवे ही आवा गी,

मुड़ मुड़ माये आसा दर तेरे आना है,

अखियां दे राही तनु दिल च वसाना है,

तेरे माँ देदार ले लखा गेडे लावा गी,

हलवे दी थाली भर भर के ले आवा गी,

सोना चांदी मंगदी न हीरे मोती मंगदी,

मैनु ता खुमारी चढ़ी बस तेरे रंग दी,

चरना दे विच बह के तनु तकि जावा गी,

हलवे दी थाली भर भर के ले आवा गी,

बंसी दे वांगु माये सबने न तार दे,

हर्शि दे वांगु माये सबने न तार दे,

बचया निमानिया नु माँ वाला प्यार दे,

हर वेले साहिल मैं शुकर मनवा गी,

ऐवे ही भुलाई सदा ऐवे ही आवा गी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।