गायत्री मंत्र एवं गायत्री वंदन

पारंपरिक
श्री राम मंत्र दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं ।

भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

चार वेद ली मातु पुनीता,

तुम ब्रह्माणी गौरी सीता

महामंत्र जितने जग माहि,

कोऊ गायत्री सम नाहिं

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं ।

भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

शाश्वत सतोगुणी माँ सतरूपा

सत्य सनातन सुधा अनूपा

हंसारूढ़ श्वेराम्बरधारी

स्वर्ण कांटी शुचि गंगन बिहारी

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं ।

भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

सकल सृष्टि की प्राण विधाता

पालक पोषक नाशक त्राता

कामधेनु तुम सुर तरु छाया

निराकार की अद्धभुत माया

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं ।

भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

जा पर कृपा तुम्हारी होई

ता पर कृपा करे सब कोई

जयति जयति जगदम्ब भवानी

तुम सम और दयालु ना दानी

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं ।

भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।