कान्हा जी मोरे, कबहूँ तो सुधि मोरी लीजो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा जी मोरे,कबहूँ तो सुधि मोरी लीजो:

कान्हा जी मोरे, कबहूँ तो सुधि मोरी लीजो,

फंसि लाख भँवर चौरासी नाचूँ,

मोहें भव से बाहर कीजो,

कान्हा जी मोरे, कबहूँ तो सुधि मोरी लीजो-----

पद सरोज अविरल दे भक्ती,

चरण शरण मोहें लीजो,

कान्हा जी मोरे, कबहूँ तो सुधि मोरी लीजो-----

हे कृपासिंधु करुणा सुखसागर,

मोहें पद पंकज रज दीजो,

कान्हा जी मोरी,कबहूँ तो सुधि मोरी लीजो-----

रचना आभार: ज्योति नारायण पाठक

वाराणसी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।