साई भगतन की भगती

पारंपरिक
श्री गणेश भजन साईं भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

हे साई नाथ तुम्हरो हमने कैसे रूप रचो पत्थर में,

जाको जैसो मन को भावे वैसे रूप रचो भगवन ने,

साई भक्तन की भगति एक ही साई रूप हज़ारो कही तो कही गणपति,

साई भगतन की भगती,

कोई लम्बी नाक बनावे,कोई बड़े कान लगावे,

जाको जैसो मन को भावे वैसे बनावे मूरति,

साई भक्तन की भगति....

शिरडी तीर्थ जो भी आवे मन वंचित फल पावे,

जाको जैसो मन को भावे वैसे ुतार्रे आरती,

साई भगतन की भगति......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।