साई की पालकी चली

पारंपरिक
श्री राम भजन साईं भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

साई की पालकी चली चावड़ी की और चली शिरडी की गली गली,

धीरे धीरे होले साई माँ की डोल चली,

साई की पालकी चली.......

चली रे गुरुवार को साई बाबा की वरतीया,

देखो क्या खूब सजी है साई की भोली सुरतिया,

उड़े रंगो की फुहारे गज़ब है अज़ाब नजारे,

साई की शान में देखो झूमे चंदा सितारे,

नाचो गाओ भिभूति लगाओ सजी है रंगोली,

साई की पालकी चली........

तू है आल्हा का नूर तू है राम का रूप,

ब्रह्मा विष्णु शंकर सब है तेरे सवरूप सभी को दिया सहरा,

जो भी आया तेरे दवारा शरधा सबुरी से तूने इस कलयुग को तारा,

साई के रंग में रंग जा भक्तो ईद जा होली,

साई की पालकी चली........

कोई आरती उतरे कोई चरणों को छुहे कोई हस गये कोई रोये,

कोई पालकी उठाये कोई बाजा भजाये कोई नाचे साई साई बोलये,

खुशियों के खुस्भू से महके भक्तो की टोली,

साई की पालकी चली...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।