झूठी है ये दुनिया सारी झूठा जग पसारा

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॥ पावन पाठ ॥

झूठी है ये दुनिया सारी झूठा जग पसारा,

जब तक सांसे साथ रहे तब बाद में करे किनारा बस इक साई नाथ हमारा,

झूठी है ये दुनिया सारी झूठा जग पसारा,

चमक धमक सूरज आवे रोज करे उज्यारा,

साथ छोड़ के साँझ को जावे करे खोर अँधियारा, बस इक साई नाथ हमारा,

झूठी है ये दुनिया सारी झूठा जग पसारा,

माटी का इक बना खिलौना लागे प्यारा प्यारा,

तोड़ तोड़ के फेर बनावे बैठा एक कुमार बस इक साई नाथ हमारा,

झूठी है ये दुनिया सारी झूठा जग पसारा,

जीवन नईया जीव फकीरा भजे सास इक तारा,

समय का झरना बेहता जाये रुके न इसकी धरा बस इक साई नाथ हमारा,

झूठी है ये दुनिया सारी झूठा जग पसारा,

इक सिरा है साई हाथ में दूजा सिरा तुम्हारा,

जब तक डोरी साई हाथ है फसे नहीं मझधारा बस इक साई नाथ हमारा,

झूठी है ये दुनिया सारी झूठा जग पसारा,

साई नाम की राह सुहानी पग पग सुखत नजारा,

चलता चल इस राह मुसाफिर लेके नाम सहारा,

तुम्ही मेरा सहारा

झूठी है ये दुनिया सारी झूठा जग पसारा,

किस्मत की रेखाएं बदले करे जो साई इशारा,

साई करे सो हो वे जग में दूजा नहीं गुजरा तुम ही मेरा सहारा,

झूठी है ये दुनिया सारी झूठा जग पसारा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।