द्वारका माई बिनु शिरडी न सोहे

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॥ पावन पाठ ॥

द्वारका माई बिनु शिरडी न सोहे,

सबुरी बिनु साई ना मिले मोरे भैया,

किशन वचन बिनु गीता न शोभे,

सतगुरु बिनु ज्ञान न मिले मोरे भैया,

गुल के बिनु गुलशन ना सोहे,

भिभूति बिना तिलक न सोहे मेरे भईया,

दीप बिनु दिवाली न शोभे,

बाहन बिनु रखियां ना शोबे भईया,

भाव बिनु भक्ति न शोबे,

साई चरण बिनु मुक्ति न मिले भईया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।