शिरडी वाले से अपनी मुलाकात हो गई

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॥ पावन पाठ ॥

भज गये ढोल नगाड़े ओये क्या बात हो गई,

शिरडी वाले से अपनी मुलाकात हो गई,

शुभ दिन आये के शुभ घडी आई बटने लगी है विदाई,

देखो देखो ओह बाबा मुश्कुराने लगा,

जिसको देखो वो ही अब गुण गुनाने लगा,

हो गये वारे न्यारे ओये क्या बात हो गई,

शिरडी वाले से अपनी मुलाकात हो गई,

जय हो तुम्हारी के जय हो तुम्हारे शिरडी के साई तिहारी,

मेरे जीवन का साथी और सहारा है तू,

सबकी बिगड़ी बनाने वाला है तू,

धन से चाँदी से खुशियों की बरसात हो गई,

शिरडी वाले से अपनी मुलाकात हो गई,

नाचो रे गाओ रे ताली बजाओ साई की पालकी सजाओ,

बाबा का जय जय कारा अब होने लगा,

बाबा भी भक्तो के संग नाचने लगा,

झील मिल तारे सितारों की अब रात हो गई,

शिरडी वाले से अपनी मुलाकात हो गई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।