बुलावो जो तुम प्रभु को प्रेम से भुलाना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बुलावो जो तुम प्रभु को प्रेम से भुलाना,

प्रेमियों के घर में रहता इनका आना जाना,

बुलावो जो तुम प्रभु को प्रेम से भुलाना,

पासे में दुर्योधन ने जब पांडव हो हराया था,

भरी सबा में जब दोर्पति का जब चीर उतरा था,

प्रेम की आवाज सुन के चीर को बढ़ाया,

प्रेमियों के घर में रहता इनका आना जाना,

सबरी ने बड़े प्रेम से जब उन्हें घर पे भुलाया था,

खाते न निकले बेर स्वयं उन्हें चख के खिलाया था,

झूठे न बेर वो था प्रेम का नजारा,

प्रेमियों के घर में रहता इनका आना जाना,

नानी बाई ने प्रेम भरे जग आंसू ढुलकाये,

बेहला को रोते देख मेरे गिरधर न रह पाए,

चुनड़ी ओढ़ाया देखो जग का पालनहारा,

प्रेमियों के घर में रहता इनका आना जाना,

ये प्रेम पुजारी है ये बस प्रेमी हो ढूंढ़ता है,

जब मिल जाता है प्रेम मेरा नटवर न रुकता है,

शुभम रूपम का कहना भूल न जाना,

प्रेमियों के घर में रहता इनका आना जाना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।