मैं तेरी कमली हो गई आ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं तेरी कमली हो गई आ माँ तनु तरस जरा नहीं आया,

तेरी जोगी रह गई माँ तनु तरस जरा नहीं आया,

लभ्या बथेरा तनु जब विच आके,

संता दी कही गल दिल च वसा के,

तेरे दर ते बह गई है तनु तरस जरा न आया,

मैं तेरी कमली हो गई आ ........

माफ़ करि मैया जेहड़े किते ने कसूर ने,

मार दे ने ताने लोकि आवि तू जरूर वे,

वे मैं एकली रह गई तनु तरस जरा न आया,

मैं तेरी कमली हो गई आ ........

मुकि न जुदाई तेरी मूक चले साह वे,

आजा इक वारी मैनु गल नल ला वे,

वे मैं सच्ची पे गई आ तनु तरस जरा न आया,

मैं तेरी कमली हो गई आ ........

बिरहा की रज दिल विच लग गई,

आ के दासी तेरी रोन लग गई है,

मैं थक के बह गई आ तनु तरस जरा न आया,

मैं तेरी कमली हो गई आ ........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।