मेरे साई का नाम

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मेरे साई का नाम मेरे बाबा का,

पतितपावन नाम है ये पतितपावन नाम है ये,

मेरे सतगुरु साई नाथ बैठे समाधि मंदिर में,

उनके दरबार में भकत आते है,

आने जाने वाले भकत कोई फूल चढ़ता है कोई नारियल फोड़ता है,

मेरे साई का नाम मेरे बाबा का,

पतितपावन नाम है ये पतितपावन नाम है ये,

मेरे बाबा बैठे नीम के निचे गुरु स्थान में,

उनके गुरु साथन में भक्त आते है,

आने जाने भकत कोई धुप जलता है,

कोई फेरे लेता है,

मेरे साई का नाम मेरे बाबा का,

पतितपावन नाम है ये पतितपावन नाम है ये,

मेरे साई बैठे पत्थर पे द्वारका माई में,

उनकी द्वारका माई में भक्त आते है,

आने जाने वाले भक्त कोई माथा टेक ता है कोई हाथ जोड़ ता है,

मेरे साई का नाम मेरे बाबा का,

पतितपावन नाम है ये पतितपावन नाम है ये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।