तू ही बाबा तू ही माई

पारंपरिक
महादेव आरती साईं भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तू ही बाबा तू ही माई,

तू ही दाता तू ही साई,

उस पल भी तू संग रहता है जिस पल संग हो न परसाई,

तू ही बाबा तू ही माई,

तू ही दाता तू ही साई,

बोर पाये फेरु तेरी माला तू मेरा मंदिर तू ही शिवाला,

जब मैं उतारू आरती तेरी हो जाए जीवन में उजाला,

जब जब ध्यान लगाया तेरा मनसे मेरे आवाज ये आये,

तू ही बाबा तू ही माई,तू ही दाता तू ही साई,

जो तेरे दर पे शीश झुकाये बाबा तेरी आशीष पाये,

हर दिल में हो प्यार तुम्हरा मिल जल हर इक दर तेरे आये,

मूड के ना देखा और कोई द्वारा जपते रहे बस साई साई,

तू ही बाबा तू ही माई,

तू ही दाता तू ही साई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।