आज मुझे न कोई रोको साई को मनाना है

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॥ पावन पाठ ॥

आज मुझे न कोई रोको के साई को मनाना है,

मांग के देखो एक बार जिन्हो ने कुछ पाना है,

आज मुझे न कोई रोको के साई को मनाना है,

जिस पे साई की मेहर हो जाये दुःख सारे उसके मिट जाये,

भव से होता पार जो साई को रिजाता है,

आज मुझे न कोई रोको के साई को मनाना है,

श्रद्धा सबुरी सबक है इनका जो जपले सुख उसे मिलता,

दुःख ना आता पास जो साई गुण गाता है,

आज मुझे न कोई रोको के साई को मनाना है,

दर पे आया तेरे सरगम गुण गाये गा तेरे हरदम,

जपना तेरा नाम तुझे ही रिझाना है,

आज मुझे न कोई रोको के साई को मनाना है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।