श्याम तेरा ये एहसान है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम तेरा ये एहसान है मेरी जग में जो पहचान है,

इस तन में जो सांसे वसी तेरे चरणों का ही दान है,

श्याम तेरा ये एहसान है मेरी जग में जो पहचान है,

जनम जब से लिया रूप देखा तेरा देखते देखते मैं हुआ हु बड़ा.

नहीं होता कही मेरा नामो निशान मेरे सिर पे नहीं होता हाथ तेरा,

तेरे उपकार से सँवारे मेरे होठो पे मुश्कान है,

इस तन में जो सांसे वसी तेरे चरणों का ही दाम है,

श्याम तेरा ये एहसान है....

जब तलक मैं जियु सांस इस तन से लू,

बस यही हो दुआ ध्यान तेरा करू,

ऐसा वर्धन दो मेरा कल्याण हो उम्र जब तक रहे तेरी सेवा करू,

मेरी कुछ भी नहीं ज़िंदगी सारी तुझपे ही कुर्बान है,

इस तन में जो सांसे वसी तेरे चरणों का ही दाम है,

श्याम तेरा ये एहसान है....

मैं तो हु इक दुआ जिसका नामो निशा बिन तेरे सँवारे इस यहां में कहा,

मेरी ऊँगली पकड़ ले चलो तुम कही पीछे पीछे चलूगा कहो गे यहाँ,

शर्मा का कुछ नहीं है वयुद तेरे हाथो में ही जान है,

इस तन में जो सांसे वसी तेरे चरणों का ही दाम है,

श्याम तेरा ये एहसान है....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।