चिठ्ठी न कोई सन्देश जाने वो कौन सा देश

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

चिठ्ठी न कोई सन्देश जाने वो कौन सा देश याहा तुम चले गये,

इस दिल पे लगा के ठेस यहाँ तुम चले गये,

इक आह भरी होगी हमने ना सुनी होगी,

जाते जाते तुमने आवाज तो दी होगी,

हर वक़्त यही है गम उस वक़्त कहा थे हम जहा तुम चले गये,

चिठ्ठी न कोई सन्देश जाने वो कौन सा देश याहा तुम चले गये,

हर चीज पे अश्को से लिखा है तुम्हारा नाम,

ये रिश्ते घर गलियां तुम्हे कर न सके सलाम,

और दिल में रह गई बात जल्दी से छुड़ा के हाथ कहा तुम चले गये,

चिठ्ठी न कोई सन्देश जाने वो कौन सा देश याहा तुम चले गये,

अब यादो के कांटे इस दिल में चुब्ते है,

ना दर्द ठहरता है ना आंसू रुकते है,

तुझे ढूंढ रहा है प्यार हम कैसे करे इकरार के हां तुम चले गये,

चिठ्ठी न कोई सन्देश जाने वो कौन सा देश याहा तुम चले गये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।