जिस स्वास तुझे भूलू वो स्वसे ठहर जाए

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॥ पावन पाठ ॥

गुर जी तेरे चरणों में हर स्वास गुजर जाये,

जिस स्वास तुझे भूलू वो स्वसे ठहर जाए,

गुर जी तेरे चरणों में हर स्वास गुजर जाये,

दुनिया से जिसे था अपना समजा वो न बन पाया,

जब दिल में तमना थी मुरशद ने ये समझाया,

दुनिया एक सपना है जो सुबह बिखर जाए,

जिस स्वास तुझे भूलू वो स्वसे ठहर जाए,

गुर जी तेरे चरणों में हर स्वास गुजर जाये,

तुझे चाहने वाले को चाहत ना रहे कोई,

तुझे भुलाने वाले को राहत न रहे कोई,

तुझे पाके भुला दे जो इंसान वो किधर जाए,

जिस स्वास तुझे भूलू वो स्वसे ठहर जाए,

मुझे तेरा सहारा है मैं और किधर जाऊ,

तू है तो रविंदर भी है बिन तेरे मैं मर जाऊ,

क्या बोले शरीरो का गर आत्मा मर जाए,

जिस स्वास तुझे भूलू वो स्वसे ठहर जाए,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।