लिख गुरु जी वल पाइयाँ चिठिया प्रेम दिया

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॥ पावन पाठ ॥

चिठिया प्रेम दिया लिख गुरु जी वल पाइयाँ चिठिया प्रेम दिया,

दर्शन नु दिल तरस रहा है नीर चमा चम् बरस रहा है,

प्रेम घटा चढ़ आइए चिठिया प्रेम दियां,

लिख गुरु जी वल पाइयाँ चिठिया प्रेम दिया,

दर्श तेरे दिया तांगा मैनु दिन रात ते उडीका तनु,

मुड़ मुड़ लिखदी अियाँ चिठियाँ प्रेम दियां,

लिख गुरु जी वल पाइयाँ चिठिया प्रेम दिया,

बक्श ले तू अवगुण मेरे मैं भी आन डिगी दर तेरे,

अरजा आके सुनैया चिठियाँ प्रेम दियां,

लिख गुरु जी वल पाइयाँ चिठिया प्रेम दिया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।