दर्शन दो गुरु जी मेरी अखियां प्यासी रे

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॥ पावन पाठ ॥

दर्शन दो गुरु जी मेरी अखियां प्यासी रे,

मेरी अखियां प्यासी रे,

मंदिर मंदिर मूरत तेरी फिर भी न दिखे सूरत तेरी,

युग बीते न आयी मिलन की पूरनमाशी रे,

दर्शन दो गुरु जी मेरी अखियां प्यासी रे,

पानी पी कर प्यास भुजाओ नैन को कैसे समजाऊ,

आँख मचोली छोड़ो अब तो मन की बाती रे,

दर्शन दो गुरु जी मेरी अखियां प्यासी रे,

मेरी अखियां प्यासी रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।