गुरूजी तुम्हारे चरणों में जब प्यार किसी का हो जाये

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॥ पावन पाठ ॥

गुरूजी तुम्हारे चरणों में जब प्यार किसी का हो जाये,

दो चार की फिर तो बात ही कया संसार उसी का हो जाये,

गुरूजी तुम्हारे चरणों में जब प्यार किसी का हो जाये,

प्रलाह्द तो छोटा बालक था पर प्यार किया परमेश्वर से,

संसार का हो कर क्या जीना इक बार ही उसी का हो जाये,

दो चार की फिर तो बात ही कया संसार उसी का हो जाये,

गुरूजी तुम्हारे चरणों में जब प्यार किसी का हो जाये,

शबरी ने कौन सा यगये किया गणका ने कौन सा वेद पड़ा,

जिस में शल कपट का लेश नहीं करतार उसी का हो जाये,

दो चार की फिर तो बात ही कया संसार उसी का हो जाये,

गुरूजी तुम्हारे चरणों में जब प्यार किसी का हो जाये,

रावण ने राम से वैर किया अब तक जलाया जाता है,

पर भगत बभीषन शरण पड़ा घर बार उसी का हो जाये,

दो चार की फिर तो बात ही कया संसार उसी का हो जाये,

गुरूजी तुम्हारे चरणों में जब प्यार किसी का हो जाये,

माया के दीवानो शिक्षा लो तुम प्रेम दीवानी मीरा से,

कर प्रेम पराये गुरु से बेडा पार उसी का हो जाये,

दो चार की फिर तो बात ही कया संसार उसी का हो जाये,

गुरूजी तुम्हारे चरणों में जब प्यार किसी का हो जाये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।