झुंझनू से दादी महारी आये

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन रानी सती दादी भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

झुंझनू से दादी महारी आये,

भक्ता ने अखियां भर भर आये,

थारो मिल के लाड लड़ावा माहरी प्यारी मावड़ी,

झुंझनू से दादी महारी आये,

चन्दन चौंकी ऊपर थाने बिठवा,

थारे चरण पखारू प्रेम से माहरी न्यारी मावड़ी,

झुहि चम्पा बेला मोगरा सा,

थाले फुला को हार पहनावा महारी प्यारी मावड़ी,

झुंझनू से दादी महारी आये,

लम्बी लो माँ चाँद और तार जड़ी माँ,

मन भावन चुनड़ी ओडावा माहरी प्यारी मावड़ी,

हरियल भागा सु पाति तुड़वाये,

थारे हाथा में मेहँदी रचावा महारी प्यारे मावड़ी,

छप्पन भोग छति सो मेवा मँगवायो,

माहने पंखो ढोल जिमा सु महारी प्यारी मावड़ी,

श्याम कवे ता सु रिश्तो पुराणों,

महान आशीष देने आई महारी प्यारी मावड़ी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।