जो मैं होता नीम का पेड़

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॥ पावन पाठ ॥

जो मैं होता नीम का पेड़,

तुझको छाया करता मैं,

तू जो सो जाता तो साईं तुझको तकता रहता मैं,

जो मैं होता नीम का पेड़..

तुझको तकते तकते साईं तुझमे ही खो जाता मैं,

तेरी किरपा की ठंडी छाया में खुद सो जाता मैं,

तेरे चरणों में शीतल जल बनके बहता रहता मैं,

तू जो सो जाता साईं तुझको तकता रहता मैं,

जो मैं होता नीम का पेड़.......

तेरा ध्यान लगाऊ साईं तेरी इबादत करू सदा,

तू न बिछड़ जाये कही इसी बात से डरु सदा,

तुझको देख देख हर गम को हस्ते हस्ते सहता मैं,

तू जो सो जाता साईं तुझको तकता रहता मैं,

जो मैं होता नीम का पेड़.....

आंख में साईं तेरा चेहरा होठो पे साईं नाम,

तेरे नाम की माला फेरु और नही कोई काम मेरा,

साईं रब है साईं खुदा है सबसे कहता रहता मैं,

तू जो सो जाता साईं तुझको तकता रहता मैं,

जो मैं होता नीम का पेड़,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।