मेरा इक साथी है वसा है जाके शिरडी में

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॥ पावन पाठ ॥

मेरा इक साथी है वसा है जाके शिरडी में ,

मैं जब भी याद करू आता है मेरे सपनो में,

जब जब दिल ये उदास होता है,

मेरा शिरडी वाला मेरे पास होता है,

साई शरण में आके मैंने सब पाया,

जीवन का मोल मुझे समज अब आया,

साई मेरा इतना न्यारा है सब के दुखो का तारणहारा है,

मेरा इक साथी है वसा है जाके शिरडी में ,

दी जीवन की डोर साई के हाथो में,

मिला साहरा मुझको हर हालातो में,

मेरा तो घर बार साई हवाले है तन मन मेरा बस साई पुकारे है,

मेरा इक साथी है वसा है जाके शिरडी में ,

शिरडी समाधी मंदिर इतना प्यारा है,

जीवन का मिटता यहाँ अँधियारा है,

पावन धुनि साई ने जलाई है ,

लाखो की पीड़ा दूर भगाई है,

मेरा इक साथी है वसा है जाके शिरडी में ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।