दर पे भुला लिया मुझको अपना बना लिया

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

दर पे भुला लिया मुझको अपना बना लिया,

जन्म जन्म की दुरी को इक पल में मिटा लिया,

दर पे भुला लिया मुझको अपना बना लिया,

दर्शन की आस थी मुझे मिलनी की प्यास थी,

भटके हुए रही को रास्ता दिखा दिया,

दर पे भुला लिया मुझको अपना बना लिया,

मैं तो नहीं था काबिल तेरे दर पर आ सकू गुरु जी,

रेहमत का दरया आप ने कैसा बहा दिया,

दर पे भुला लिया मुझको अपना बना लिया,

मेरी विनती सुनी गुरूजी बड़ी मेहरबानी की,

सूखे से जीवन में सावन सा ला दिया,

दर पे भुला लिया मुझको अपना बना लिया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।