गुरुजी तुम्हारे प्यार ने जीना सिखा दिया

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॥ पावन पाठ ॥

गुरुजी तुम्हारे प्यार ने जीना सिखा दिया,

हम को तुम्हरे प्यार ने इंसा बना दिया,

गुरुजी तुम्हारे प्यार ने जीना सिखा दिया,

भुला हुआ था रास्ता भटका हुआ था मैं,

किस्मत ने मुझको आप के नजदीक ला दियाँ,

हम को तुम्हरे प्यार ने इंसा बना दिया,

गुरुजी तुम्हारे प्यार ने जीना सिखा दिया,

जिस दिन से मुझको आप ने अपना बना लिया,

दोनों जहां को दास ने कब से भुला दियाँ,

हम को तुम्हरे प्यार ने इंसा बना दिया,

गुरुजी तुम्हारे प्यार ने जीना सिखा दिया,

जिसने किसी को आज तक सजदा नहीं किया,

वो सिर भी मैंने आप के दर पर झुका दिया,

हम को तुम्हरे प्यार ने इंसा बना दिया,

गुरुजी तुम्हारे प्यार ने जीना सिखा दिया,

रहते है जलवे आप के नजरो में हर घडी,

मस्ती का याम आपने ऐसा पिला दिया,

हम को तुम्हरे प्यार ने इंसा बना दिया,

गुरुजी तुम्हारे प्यार ने जीना सिखा दिया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।