बंशी बजेगी राधा नाचेगी

सौरभ मधुकर
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बंशी बजेगी राधा नाचेगी

चाहे जग रूठे तो रूठ जाए

तेरी बंशी बड़ी जादूगारी

जुलम मेरे साथ करे

सारी रात जगाये,बैरन मेरी नींद चुराए

मै तो नाचूंगी

चाहे घर छूटे तो छूट जाए

बंशी बजेगी राधा नाचेगी

राधे रानी हुई रे दीवानी ब्रिज के साँवरिया

मन ही मन चाहे लेकिन तुझको बोल न पाए

मैं तो चाहूंगी, मैं तो चाहूंगी

चाहे नव टूटे तो टूट जाए

बंशी बजेगी राधा नाचेगी

हरष बोले मुरलिया से कहना बचा कोई आज तलाक

भक्तों के यह होश उड़ाए साड़ी रात नचाए

सेवक नाचेंगे, के छम छम नाचेंगे

चाहे छत टूटे तो टूट जाए

बंशी बजेगी राधा नाचेगी

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।