मेरी उलझन ना सुलझी

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॥ पावन पाठ ॥

मेरी उलझन ना सुलझी

मैं द्वारे तिहारे आया।

विपदाऐं खुद बोई हमने

काँटों में फूल न पाया।

सुलझाने को हर उलझन

तन साथ लिए आया अपने

पर अज्ञानी मन हे प्रभु जी

कभी साथ न मेरे आया।

माया मोह की भारी गठरी

बोझ लिए भटका जीवन

ज्योति तेरे दर की पावन

दरश भी ना कर पाया ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।