तनु कौन करेगा पार

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॥ पावन पाठ ॥

तनु कौन करेगा पार,

जे तू गुरा नाम नई जपिया,

तनु कौन करे गा पार,

एह धन दौलत पाप कमाई,

इसने जग न विपदा पाई,

रेहँदी ना इक सार,

तनु कौन करे गा पार,

जनम अमुला कदर न जानी,

रूल गई एवे जिंदनिमानी,

आन फसे मझधार तनु कौन करे गा पार....

जे तू आखे कुडम कबीला पार हों दा एह वसीला,

एह पैसे दे यार तनु कौन करेगा पार,

एह नहीं आने काम बखेड़े,

ओथे रमला नाल नबेड़े,

हूँ भी सोच विचार तनु कौन करे गा पार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।