तू माफ़ करे गा मेरे सारे गुनाह

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॥ पावन पाठ ॥

तू माफ़ करे गा मेरे सारे गुनाह,

साई देवा साई देवा साई नाथ

तेरे दर पर जो सजदे में यहाँ पलके भिगोई है,

जिस्म को रोया है बाबा रूह मेरी साथ रोइ है,

सुना दर से तेरे कोई कभी खाली नहीं लौटा,

मेरा तो तू ही शंकर है मेरा तो तू ही है मौला,

तू रहीम जहां का तू ही सका खुदा,

साई देवा साई देवा साई नाथ

तेरे दरबार में आकर इबादत जो भी करता है,

जो मांगे तुझसे कोई क्या तू सबकी झोली भरता है,

महोबत की नजर बाबा तेरी अगर जिसपर हो जाये,

उसको मौलम भी न हो नसीब उसका सव्वर जाए,

तेरे नाम से साई रोशन जग ये हुआ,

साई देवा साई देवा साई नाथ

मैंने छोड़ दिया इस दुनिया को तेरे नाम का ऐसा नशा हुआ,

जो पीले साई नाम का जाप वो साई नाम है जपता रहा,

तेरी शिरडी में जो आये उसे दुःख हो नहीं सकता,

जो सीमारे साई नाम माला उसका कोई काम नहीं रुकता,

तेरे चरणों में साई सदा करू सेवा,

साई देवा साई देवा साई नाथ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।