ज्योत जगाई है आओ पधारो माँ

पारंपरिक
श्री गणेश भजन दुर्गा भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

ज्योत जगाई है आओ पधारो माँ,

सहज सजाई है आन विराजो माँ,

दर्शन देदो माँ हे चिंतपूर्णी भाग जगा दो माँ,

आके सबके बिगड़े काज सवारों माँ,

हाथो में ध्वजा लहराए वीर लम्बर के,

पूजे है तुमको भेरो तुझको बाबा भेरो जी,

दर पे दर्शन देदो माँ,

चिंतपूर्णी भाग जगा दो माँ,

आके सबके बिगड़े काज सवारों माँ,

श्रिष्टि रचेता भोले नाथ संग आओ माँ,

साथ में गणेश जी का दर्श करवाओ माँ,

दर पे दर्शन देदो माँ,

चिंतपूर्णी भाग जगा दो माँ,

आके सबके बिगड़े काज सवारों माँ,

नारद शारद मैया गुण तेरा गाये,

सुर नर मुनि जान तेरे को ध्याए,

दर पे दर्शन देदो माँ,

चिंतपूर्णी भाग जगा दो माँ,

आके सबके बिगड़े काज सवारों माँ,

भक्त खड़े है मैया द्वार तुह्मरे,

सबका है जीवन मैया तेरे सवारे दर पे दर्शन देदो माँ,

चिंतपूर्णी भाग जगा दो माँ,

आके सबके बिगड़े काज सवारों माँ,

घर परिवार सब तुझको निहारे माँ,

पूजा की थाली लिए आरती उतारे माँ,

दर पे दर्शन देदो माँ,

चिंतपूर्णी भाग जगा दो माँ,

आके सबके बिगड़े काज सवारों माँ,

भक्तो के मन में रहती बन के तू मीत माँ,

तुझको पुकारे तेरा दास अजीत माँ

दर पे दर्शन देदो माँ,

चिंतपूर्णी भाग जगा दो माँ,

आके सबके बिगड़े काज सवारों माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।