सहे तो सहे कैसे दुःख इतने

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सहे तो सहे कैसे दुःख इतने,

कहे तो कहे किस से गम अपने,

आखिरी है दर तेरा सोच के मैं आयी हु,

दुःख दर्द के सिवा कुछ भी न लाइ हु,

अंसुवन की केवल लगी है झड़ी,

सिर पे मुसीबत पड़ी है बड़ी,

सहे तो सहे कैसे दुःख इतने,

किया था भरोसा मैंने तेरी दुनिया दारी पे,

हस्ता है हर कोई मेरी लाचारी पे,

गिरते हुए को और गिराया खेल तो घटका समज ना आया,

सहे तो सहे कैसे दुःख इतने

कहते है लोग तुझे हारे का सहारा है,

नज़रे उठा के देखो श्याम तिहारा है,

अब फैंसला तुम ही करो ठुकरा दो या फिर बाहो में धरो,

सहे तो सहे कैसे दुःख इतने

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।