किसी की नैया का

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॥ पावन पाठ ॥

किसी की नया का माझी बन जाती है,

किसी के जीवन का साथी बन जाता है,

जो प्यार करता है उसका हो जाता है,

किसी की नया का माझी बन जाती है,

साईं नईया साईं ही माझी इसकी रजा में दुनिया है राजी,

साहिल से पहले तो ये खुद आ जाता है,

किसी की नया का माझी बन जाती है,

जिस ने बनाया बाबा को साथी,

जीवन में विपदा कभी नही आती,

विपदा से पहले तो ये खुद आ जाता है,

किसी की नया का माझी बन जाती है,

मेरा साईं बाबा प्रेम का भूखा,

मेरे साईं की प्रेम है पूजा,

ये प्रेम खातिर तो कुछ भी कर जाता है,

किसी की नया का माझी बन जाती है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।