आजा कान्हा प्यासी हैं अंखियां

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आजा कान्हा प्यासी हैं अंखियां,

झर झर रोये ये सारी रतियाँ,

दर्शन देदे कब से मैं तरसु,

तरसाओ न आ जाओ छलियाँ,

तू ही मेरी ज़िंदगी तू ही है हर ख़ुशी,

बाबा मेरे तू ही मेरी बंदगी,

आजा आजा श्याम मन वसियां,

तू ही मेरा केवल हारा तुझपे मैंने तन मन वारा,

हुसन दाता तुम्हारा दास तेरा अरदास लगाये,

मैं हु तेरा दीवाना सँवारे गले लगाना ना मुझे तू विस्राणा,

तू ही मेरी ज़िंदगी तू ही मेरी हर खुशी बाबा मेरे तू ही मेरी बंदगी,

आजा आजा श्याम मन वसियां,.......

श्याम मेरी आस न टूटे श्याम तेरा साथ न छूटे श्याम विश्वाश न छूटे,

दास तेरा अरदास लगाये,

दिल को बस तू ही पाया चैन तुमने चुराया,

बाबा रओ मुझको भूल्या,

तू ही मेरी ज़िंदगी तू ही मेरी हर खुशी बाबा मेरे तू ही मेरी बंदगी,

आजा आजा श्याम मन वसियां,.......

श्याम मेरे आस पुगादे श्याम मोहे दर्श दिख दे,

सही तकदीर जगा दे दास तेरा अरदास लगा दे,

श्याम ये हरष पुकारे श्याम मोहे ना तरसा रे मैं तो हु तेरे सहारे,

दास तेरा अरदास लगाये,

तू ही मेरी ज़िंदगी तू ही मेरी हर खुशी बाबा मेरे तू ही मेरी बंदगी,

आजा आजा श्याम मन वसियां,.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।