आजा मार शेरावालिये मेहरा दे छीटे

पारंपरिक
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

करदे साढ़े लेख दातिए कालिया तो चीते,

आजा मार शेरावालिये मेहरा दे छीटे,

दर्श तेरे दी आस लगा के बैठे भगत प्यारे,

नाम तेरे दे रंग विच रंगे बोलदे पये जयकारे,

कना दे विच रश घोलदे बोल ओहना दे मीठा,

आजा मार शेरावालिये मेहरा दे छीटे,

भवन तेरे दे आगे खड़के करदे हां फर्यादा जी,

श्रदा भेट चढ़ा के तेरी पानिया आज मुरादा,

आउंदी तेरी शेर सवारी किधरे रामा दिसे,

आजा मार शेरावालिये मेहरा दे छीटे,

मेहरा करके मेहरा वाली साड़ी मुश्किल हल करो,

मर जाना सुख राज कहे सादे सिर ते हाथ धरो,

ना फुरिये दे मान दतिये पे न जावन फीके,

आजा मार शेरावालिये मेहरा दे छीटे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।