गौरा दा लाडा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

डमरू ढोल नगाड़े वज्दे,

खुशियां दे विच बदल गज्जदे,

ओ वेखो नी कहदा ए साधा दा ताड़ीपाड़ा,

नी गोरा दा लाडा,

गिठ गिठ लमके वाला नी फेर वी लगे प्यारा नी गोरा,

लाडे ल्याणदे रथ गड़िया कोई घोड़ी चढ़के आवे ,

सोहने सोहने जांजी अपनी जांज दे विच ले आवे ,

पर मैं वेख्या पहली वारी बैल ते चढ़या लाडा नी गोरा,

मुख ते लाली चमका मारे फेर रंग होंठा ते लाया,

सीरिया दी बस राख मत्थे ते लाडा मलके ल्याया,

ओ वेखो नी लायी जांदा लाडा भांग दा हाड़ा,

भंग धतूरा पी पी के सुट्टे ते सुट्टा लोंदे,

भूत प्रेत वी साधुओं दे नाल नचदे टपदे गौदे,

सहने वालेया मखना वे पाउगा नवा पवाडा,

कुंज बिहारी गौतम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।