जे तू गुरुआ दा नाम नहियो जपया

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॥ पावन पाठ ॥

तनु कौन करेगा पार तनु कौन करेगा पार,

जे तू गुरुआ दा नाम नहियो जपया,

तनु कौन करेगा पार तनु कौन करेगा पार,

एह धन दौलत पाप कमाई जिस ने जग न विपदा पाई,

रेहँदी न इक सार तनु कौन करेगा पार तनु कौन करेगा पार,

जन्म अंमुला कदर न जाने रूल गई ऐवे जींद निमाणी,

आन फसे मझदार तनु कौन करेगा पार तनु कौन करेगा पार,

जे तू आखे कुडम कबीला पार हों दा के वसीला,

पार हों दा एह वसीला एह पासी दे यार,

तनु कौन करेगा पार तनु कौन करेगा पार,

एह नहियो आने कम बखेड़े औखे गम ना नाल नबेड़े,

हूँ भी सोच विचार तनु कौन करे गा पार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।