गुरु जी मेरे आये मेहरा हो गइयाँ

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॥ पावन पाठ ॥

मेहरा हो गइयाँ मेहरा हो गइयाँ,

गुरु जी मेरे आये मेहरा हो गइयाँ,

जिथे चरण टिकाये मेहरा हो गइयाँ,

गुरु जी मेरे आये मेहरा हो गइयाँ,

सतगुरु दे चरना विच वरकत,

वरकत दे विच वसदा अमृत,

जो पीवे तर जावे मेहरा हो गईया,

गुरु जी मेरे आये मेहरा हो गइयाँ,

जिथे गुरु जी चरण टिकाउँदे,

कष्ट रोग सारे मिट जांदे,

सत्संग विच गुरु आये मेहरा हो गाइयाँ,

गुरु जी मेरे आये मेहरा हो गइयाँ,

भीलनी ने चरनामत पीता दर्शन उसने राम दा किता,

झूठे बेर खिलाये मेहरा हो गईया,

गुरु जी मेरे आये मेहरा हो गइयाँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।