तड़प तुमसे मिलने की

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॥ पावन पाठ ॥

तड़प तुमसे मिलने की गुरु जी और बढ़ जाये,

तुम्हे देखु गुरु जी बस मेरा जीवन सवार जाये,

तुम्ही तुम हो मेरे जीवन में दूसरा न कोई है,

तुम्हरे बिन मेरे गुरुवार ये ज़िंदगी अधूरी है,

के आ जाओ मेरे जीवन में करदो आशाये पूरी,

तड़प तुमसे मिलने की ............

आ कष्टों से भरा जीवन दिखे आशा की इक ज्योति,

बड़े मंदिर में आ कर के मिले सुखो के सब मोती,

दर्श तेरा मैं पा जाऊ तेरा ही प्यार मिल जाये,

तड़प तुमसे मिलने की.........

जिहने तुम मिल गए गुरु जी उन्हें न परवाह न दुनिया की,

भरी थी काँटों से रहे बिषा दिए तुमने मोती,

करे शुकराना हर पल में हम तुझमे ही समै जाए,

तड़प तुमसे मिलने की ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।