गुरूजी मेरी बेटी को रखना सदा खुशहॉल

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॥ पावन पाठ ॥

गुरूजी मेरी बेटी को रखना सदा खुशहॉल,

हाथ जोड़ के करा विनती पुरे करो सवाल,

गुरूजी मेरी बेटी को रखना...

जिस घर में मेरी बेटी जावे उस घर में दुःख कभी ना आवे,

दया करो मेरे गुरु जी उसके संकट देना टाल,

गुरूजी मेरी बेटी को रखना....

बेटी तू है धन पराया कौन इसे है रख पाया,

इक दिन तोहे जाना पड़ता बेटी को ससुराल,

गुरूजी मेरी बेटी को रखना.....

बाबुल तुझको क्या दे बेटी दिल से यही दुआ है बेटी,

घर आंगन में खुशिया बरसे हो वे मालामाल,

गुरूजी मेरी बेटी को रखना ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।