सुख पाया सुख पाया

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सुख पाया सुख पाया,

रेहम तेरी सुख पाया,

सदा नानक की अरदास,

सुख पाया सुख पाया,

मेहरबान साहिब मेहरबान,

साहिब मेरा मेहरबान,

जी सगल को दे हे दान,

साहिब मेरा मैं निर्वाण,

सुख पाया सुख पाया,

तू काहे डोले प्राणिया,

सूद राखे गा सिरजन हार,

जीने पैदाइश तू किया सोइ करदा सार,

सुख पाया सुख पाया,

जीने उपाई मेदीन सोइ करदा सार,

घट घट मिला दिला का सच्चा परवत गार,

सुख पाया सुख पाया,

कुदरीत की ना जानिये,

बड़ा भेप्रवाहा,

कर बंदे तू बंदगी जे चर घट में साहवा,

सुख पाया सुख पाया,

तू समरथ अगथ अगोचे,

जियु पिंड तेरी रास,

रेहम तेरी सुख पाया सदा,

नानक ही अरदास,

सुख पाया सुख पाया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।