चिठिये नी हाये चिठिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चिठिये नी हाये चिठिये लब ले नी पता माई दा,

तनु दिल दी शाही नाल लिखियाँ,

दस देवी की बचड़े तेरे रुसे तेरे नाल नी,

नी तू हाल मुर्रीदा दा ना पूछियां,

चिठिये नी हाये चिठिये लब ले नी पता माई दा

दिल दियां कदो तक दिल विच रखिये,

तनु भी न दसिये ते होर कीह्नु दसिये,

कदो तक नैना विच लाइ रखना तू,

दसदे साढ़े वल कदो तकना है तू,

कदो तक महरा वाली आसा लाये रखिये,

मेहरा वालिये जरा सुन ले टूट जाने ने बछड़े तेरे,

जे तू बच्या दे दुखा न नहीं वंडिया,

चिठिये नी हाये चिठिये.....

साढ़े उते दतिये एहना उपकार कर ,

बच्चे हां आसी भी तेरे साहनु भी तू प्यार कर,

लाइ जेहड़े तेरे नाल कदे टूट जाए न,

साढ़े हाथो रेहमता डोर छूट जावे न,

मेहरा नाल जगमग साडा संसार कर,

कर दे वेडा पार दतिये तार दे जाके दुभ जान दे,

महरानिये तेरे ते ऐसी छदया,

चिठिये नी हाये चिठिये .........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।