मुझे माँ ने भुलाया मैं दौड़ा आया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी माँ का भुलावा आया मेरा सोया भाग जगाया,

भवनों से भोली माँ ने सन्देश मुझे भिजवाया,

सुन ली पुकार फिर इक बार शुभ दिन ये दिखया,

मुझे माँ ने भुलाया मैं दौड़ा आया,

ये पर्वत रोक न पाएंगे अब राहत सब से मेरी,

बदल बरसे बिजली गरजे या आये आज अँधेरी,

हर सांस में बन के योगी माला मैया की फेरी,

बेटे से आज मिलने में मैया न करे गी देरी,

रख लेंगी लाज फिर देगी आज अपने अंचल की छाया,

मुझे माँ ने भुलाया मैं दौड़ा आया,

समजा दे कोई ढोली को जरा जम के ढोल बजाए,

मैं झूम के तब तक नाचू गा जब तक भवन ना आ जाये,

कोई घुंगरू मुझे पहनाये कोई टीका लाल लगाए,

मेरे सिर पे बांध के चुनरी मुझे आज सजाया जाए,

दू माँ के दरबार पे सब मैं वार सब माँ से पाया,

मुझे माँ ने भुलाया मैं दौड़ा आया,

इस बार भी न लौटाए गी माँ खाली,

पहना के माँ भेजी गी ताबीज दुआओ वाली,

मेरी माँ है भोली भाली मेरी बात कभी न टाली,

हर कदम पे माता रानी करती है मेरी रखवाली,

सच है ये बात मेरे साथ साथ है माँ का साया ,

मुझे माँ ने भुलाया मैं दौड़ा आया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।