मैनु रोक ना गुरु दे दर जा लें दे

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॥ पावन पाठ ॥

मैनु रोक ना गुरु दे दर जा लें दे,

जाके अपने गुरु जी न मना लेंदे,

मैनु रोक ना गुरु दे दर जा लें दे,

अपने करुण न बाहर छोड़ दे जा,

दिल नाल गुरु दी शरण विच जा,

नूर आसमानी जिद्दी दुनिया दीवानी,

तनु सब कुछ मिलेगा तू देख्दा जा,

मैनु रोक ना गुरु दे दर जा लें दे,

सच्चा रिश्ता गुरु जी नाल बना ले,

मंग न तू ओहना नू मना लै,

ओह अंतर्यामी नूरा वाले नूरानी,

तेरे कष्ट हरे गे तू हर लें दे,

मैनु रोक ना गुरु दे दर जा लें दे,

हूँ फ़िक्र न कर नाही रोना,

हूँ ते कुछ भी नहीं खोना,

जदो नाल है गुरु जी फिर चिंता किस गल दी,

ओहना नू ही सब कुछ संभाल लें दे,

ॐ नामय शिवाये शिव जी सदा सहाये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।