माफ़ करो गुरु जी माफ़ करो

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॥ पावन पाठ ॥

माफ़ करो गुरु जी माफ़ करो,

मेरी जान उजली मैं तो मिटी की डेरी,

सुन अरजा तू मेरी मुझे माफ़ करो,

माफ़ करो गुरु जी माफ़ करो,

इतने दुःख इस दुनिया में मर जाऊ मैं,

नजर पड़े तो डूबती डूबती तर जाऊ मैं,

याह दुखो के अँधेरे और पाप ये मेरे अब करदे सवेरे माफ़ करो,

माफ़ करो गुरु जी माफ़ करो,

तूने वादा किया मैंने पूरा किया,

तूने दिल से दिया तेरा शुक्र किया,

तूने और दिया देता ही गया देता ही गया,

मैंने हवा में उड़ना सीख लिया,

मेरी अगली नजर सितारों पर फिर भी मैं तेरे सहरो पर,

.माफ़ करो गुरु जी माफ़ करो,

मैं रूसा हु गलती कर देता अब तेरी आहे में मैं डूबा रहता,

तूने बार बार मुझे माफ़ किया करता ही गया,

तेरी दया को मैं न समज स्का,

अब जा कर समज में आया है,

तेरी रेहमत का वो रंग रंग,

माफ़ करो गुरु जी माफ़ करो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।