तेरे चरणों में मेरे गुरु

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॥ पावन पाठ ॥

तेरे चरणों में मेरे गुरु मैं बिगड़ी बनाने आया हु,

जो बात किसी से बन न सकी,

वो बात बनाने आया हु,

तेरे चरणों में मेरे गुरु मैं बिगड़ी बनाने आया हु,

माँ बाप ने मुझको जन्म दिया पर ज्ञान मिला इन चरणों में,

शिक्षक ने मुझको दी शिक्षा वरदान मिला इन चरणों में,.

अब ज्ञान की बिक्शा से अपनी झोली भरवाने आया हु,

तेरे चरणों में मेरे गुरु मैं बिगड़ी बनाने आया हु,

इस जग की मुझको फ़िक्र नहीं,

चिंता है गुरु जी आगे की,

जो तोड़े से भी ना टूटे मुझको खोज है ऐसे धागे की,

ये ही करके सोच विचार यहाँ धागा बंधवाने आया हु,

तेरे चरणों में मेरे गुरु मैं बिगड़ी बनाने आया हु,

दुनिया की माया नगरी में कोई चीज मुझे अब भाति नहीं,

दिन बेचैनी में कट ता है रातो को नींद भी आति नहीं,

इस उल्जी हुई पहेली को मैं तो सुलझाने आया हु,

जो बात किसी से बन न सकी,

वो बात बनाने आया हु,

तेरे चरणों में मेरे गुरु मैं बिगड़ी बनाने आया हु,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।