सज धज के गुरु जी घर आये

पारंपरिक
महादेव भजन गुरुदेव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सज धज के गुरु जी घर आये,

लोको वे मैं आज झली हो गई,

मैनु कुज भी समज ना आये लोको मैं आज झली हो गई,

कदी भी नहीं सोचिया सी गुरु घर आन गे,

मेरा खजाना मेरी झोली विच पान गे,

ओहना ने चरण कमल घर पाए,

लोको वे मैं आज झली हो गई,

सज धज के गुरु जी घर आये,

सत्संग विच सारी संगत बुलाई है,

गुरु जी दे भगता ने आज रौनक लगाई है,

आज शिव जी ने संख बजाए लोको मैं आज झली हो गई,

सज धज के गुरु जी घर आये,

बड़ी रीजा नाल दरबार सज्या है,

गुरु जी न हलवे दा भोग लगाया है,

मुख मंडल गुरु दा मुस्काये लोको मैं झली हो गई,

सज धज के गुरु जी घर आये,

फुला दी महक नाल घर मेरा भराया,

मैं भी तरी जो भी इथे आया ऊ भी तरिया,

सोन्दे जाग्दे गुरु नजर आये लोको मैं आज झली हो गई,

सज धज के गुरु जी घर आये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।