गुरु देव मेरे तुमको भगतो ने पुकारा है

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॥ पावन पाठ ॥

गुरु देव मेरे तुमको भगतो ने पुकारा है,

आओ अब आ जाओ ईब तेरा सहारा है,

है चारो तरफ छाया मेरे गौर अँधेरा है,

अब जाए कहा बोलो तूफानों ने गेरा है,

ये नाथ अनाथो को तेरा ही सहारा है,

गुरु देव मेरे तुमको भगतो ने पुकारा है

मजधार पड़ी नैया डगमग ढोला खाये,

मिल जाओ हमे आकर हम भाव से तर जाये,

बिन तेरे नहीं इस जग में इक पल भी गुजरा है,

गुरु देव मेरे तुमको भगतो ने पुकारा है

तेरे इन चरणों की धूलि ही जो मिल जाये,

भटके हुए रही को निज मंजिल मिल जाये,

किस्मत भी चमक जाये जो चमके सितारा है,

गुरु देव मेरे तुमको भगतो ने पुकारा है

सेवा गुरु चरनन की मुकति भव तरणं की,

महिमा गुरु वर्णन की ज्ञाता शुभ कर्मण की,

गुरु ज्ञान सा जीवन की बहती एक धरा है,

गुरु देव मेरे तुमको भगतो ने पुकारा है

ब्रह्म सम गुरु शक्ति को कोई पार नहीं पाए,

दो दर्शन गुरु वर चरणों में लिप्त जाये,

ये भक्त सदा करता गुण गान तुम्हरा है,

गुरु देव मेरे तुमको भगतो ने पुकारा है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।