गुरु जी तुम हमारी आशा तुम ही विश्वाश हो

पारंपरिक
महादेव भजन गुरुदेव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गुरु जी तुम हमारी आशा तुम ही विश्वाश हो,

गुरु जी तुम ही ज़मीन तुम ही आकाश हो,

गुरु जी तुम हमारी आशा तुम ही विश्वाश हो,

ॐ नमः शिवाये शिव जी सदा सहाये,

ॐ नमः शिवाये गुरु जी सदा सहाये,

मुझ पर भी करुणा करना मैं आया शरण तुम्हारी,

मैं जोड़े हाथ खड़ा हु तेरे दर का बना भिखारी,

तुम सबसे बड़े भंडारी मैं पानी तुम हो चन्दन,

गुरु जी तुम हमारी आशा तुम ही विश्वाश हो,

तुम्हरा नाम बड़ा दुनिया में सब तेरा ही गुण गए,

इस जग के सब नर नारी चरणों में तेरे शीश निभाए,

करे भव से पार मुझे गुरु जी संकट मोचन,

गुरु जी तुम हमारी आशा तुम ही विश्वाश हो,

मैं तेरी आस लगाई मेरी सुनलो दुगरी नंदन,

गुरु महाराज हमारे काटो दुःख के बंधन,

तुम तो सब के महाराजा,

तुम्हे कहता है दुःख बंजन,

गुरु जी तुम हमारी आशा तुम ही विश्वाश हो,

तुम सांसो में आते जाते एक तुम्ही से है सब नाते,

तुम ही तो हो बंधू हमारे जो सभी को अपनाते,

गुरु जी चरणों में हमे लेलो हम करते है ये बंधन,

गुरु जी तुम हमारी आशा तुम ही विश्वाश हो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।