मेरे भोले दा डमरू किथे वजया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे भोले दा डमरू किथे वजया

जिथे जिथे वजया लहरा लहरा हो गईया

डमरू जा बज्या परमंदिर

ऊथे सी गौरा दा मंदिर

मेरे भोले........

डमरू जा बज्या प्रेम मंदिर

ऊथे सी राधा दा मंदिर

मेरे भोले........

डमरू जा बज्या राम मंदिर

ऊथे सी सीता दा मंदिर

मेरे भोले.........

डमरू जा बज्या मनसा मंदिर

ऊथे सी दुर्गा दा मंदिर

मेरे भोले.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।